इमाम कस्तलानी और मीलाद शारहे बुखारी, इमाम कस्तलानी अलैहिर्रहमा फरमाते हैं कि हुज़ूर ﷺ की पैदाइश के महीने में अहले इस्लाम हमेशा से महेफिलें मुनक्किद करते चले आये है और ख़ुशी के साथ खाने पकाते रहे और दावत -ए- त्आम करते रहे है और इन रातो में अनवा -ओ- अक़्साम (तरह तरह के) खैरात करते रहे और सुरूर ज़ाहिर करते चले आये हैं और नेक कामो में हमेशा ज़्यादती करते रहे हैं और हुज़ूर ﷺ के मौलिद -ए- करीम की किरात का एहतेमाम -ए- खास करते रहे हैं जिनकी बरकतों से इन पर अल्लाह त्आला का फ़ज़्ल ज़ाहिर होता रहा है और इसके खवास से ये अम्र मुजर्रब है के इनिकादे महफिले मीलाद उस साल में अमन -ओ- अमान का सबब होता है और हर मक़सूद व मुराद पाने के लिए जल्दी आने वाली ख़ुशख़बरी होती है तो अल्लाह त्आला उस शख्स पर बहुत रहमतें फरमाये जिसने माहे मीलाद मुबारक की हर रात को ईद बना लिया ताकि ये ईद मीलाद सख्त तरीन इल्लत हो जाये उस शख्स पर जिसके दिल में मर्ज़ व इनाद है। अल्लामा इब्ने हाज ने मदखल में तवील कलाम किया है उन चीज़ों के इंकार करने में जो लोगों ने बिद'अते और नफ़्सानी ख्वाहिशें पैदा कर दी हैं और आलात -ए- मुहर्रमा के साथ अमल -ए...